ब्रह्मलीन महंत श्री भागीरथ पुरी जी
ब्रह्मलीन 30 अक्टूबर 2019 समाधि 30 अक्टूबर 2019
किसी भी पवित्र धार्मिक स्थल की ऊर्जा उसके संतों, तपस्वियों और सेवाभाव रखने वाले महात्माओं की साधना से जीवंत रहती है। प्राचीन श्री बलभद्र मंदिर, धौलरा के इतिहास में महंत श्री भागीरथ पुरी जी का नाम अत्यंत आदर और कृतज्ञता के साथ लिया जाता है।
महंत श्री भागीरथ पुरी जी ने अपने जीवन के 30 से अधिक वर्ष भगवान श्री बलभद्र (दाऊजी महाराज) की अनन्य सेवा, पूजा-पाठ और मंदिर की देखरेख में समर्पित कर दिए थे। उन्होंने हर परिस्थिति में मंदिर की मर्यादा, पवित्रता और सेवा भाव को सर्वोपरि रखा। उनके सानिध्य में मंदिर ने आध्यात्मिक उन्नति के साथ-साथ क्षेत्र के श्रद्धालुओं के बीच गहरी आस्था का केंद्र बनने का गौरव प्राप्त किया। उनका पूरा जीवन सादगी, परोपकार और दाऊजी महाराज की भक्ति की मिसाल था।
अपनी दीर्घकालीन तपस्या और सेवा को पूर्ण करते हुए, 29 अक्टूबर 2019 को गाँव सांगीपुर के मोड़ के पास एक सड़क दुर्घटना में उन्हें गंभीर चोटें आईं। उन्हें तुरंत पहले रादौर, फिर यमुनानगर और तत्पश्चात बेहतर इलाज के लिए चंडीगढ़ ले जाया गया, जहाँ उपचार के दौरान उन्होंने अपनी नश्वर देह का त्याग कर दिया और वे भौतिक शरीर से पंचतत्वों में विलीन होकर ब्रह्मलीन हो गए।
उनकी इस महान तपस्या और दाऊजी के प्रति उनके अगाध प्रेम व समर्पण को चिरस्थाई रखने के लिए मंदिर परिसर में ही 30 अक्टूबर 2019 उनकी पावन समाधि की स्थापना की गई है। आज भी जो श्रद्धालु मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं, वे महंत जी की समाधि पर नतमस्तक होकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। उनकी उपस्थिति और आशीर्वाद की ऊर्जा आज भी इस पावन धाम के कण-कण में विद्यमान है।